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चुनाव आयोग मौका देगा तो EVM की छेड़छाड़ को साबित करके दिखाएंगे: सौरभ भारद्वाज

चुनाव आयोग मौका देगा तो EVM  की छेड़छाड़ को साबित करके दिखाएंगे: सौरभ भारद्वाज

ईवीएम की ROM  से साबित हो सकती है वोटिंग मशीन की टैम्परिंग

 

ईवीएम से छेड़छाड़ के मुद्दे पर आम आदमी पार्टी ने राष्ट्रीय चुनाव आयोग से मांग है कि आयोग सभी पार्टियों के प्रतिनिधियों और आयोग के विशेषज्ञों को मिलाकर एक कमेटी का गठन करे तो हम उस कमेटी के समक्ष ईवीएम की ROM की सहायता से ईवीएम टैम्परिंग को साबित करके दिखा देंगे। चुनाव आयोग द्वारा बुलाई गई ऑल पार्टी मीटिंग में भी आम आदमी पार्टी इस मुद्दे को उठाएगी और चुनाव आयोग से मांग करेगी।

इस मुद्दे पर पार्टी कार्यालय में आयोजित हुई प्रेस कॉंफ्रेंस में बोलते हुए पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता एंव विधायक सौरभ भारद्वाज ने कहा कि ‘ईवीएम से छेड़छाड़ के बारे में बात करते वक्त दो प्रश्न सामने आते हैं जिसमें पहला प्रश्न ये कि क्या ईवीएम से छेड़छाड़ हो सकती है? जिसका जवाब मंगलवार को दिल्ली विधानसभा में किए गए डैमो के द्वारा दिया गया जिसे पूरे देश ने देखा। और दूसरा सवाल यह है कि क्या हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव में ईवीएम के साथ छेड़छाड़ हुई है? इसे साबित करने के लिए हमें चुनाव आयोग से सहयोग की आवश्यकता होगी।

हम चुनाव आयोग से मांग करते हैं कि आयोग सभी पार्टियों के प्रतिनिधियों और आयोग के विशेषज्ञों की एक कमेटी गठित करे और उस कमेटी के समक्ष हम हाल के विधानसभा चुनाव में इस्तेमाल हुई आयोग की उन मशीनों की ROM से कास्ट किए गए वोटों की सिक्वेंस के आधार पर क्रॉस सत्यापन कर सकते हैं जिससे यह पता लगाया जा सकता है कि मशीन ठीक थी या फिर मशीन के साथ छेड़छाड़ की गई। इस क्रॉस सत्यापन के लिए राजनीतिक पार्टियों की सहमति के बाद रैंडमली किन्हीं भी पांच बूथ को चुना जा सकता है जिनके वोट क्रम को चुनाव आयोग ने रजिस्टर में व्यवस्थित भी किया हुआ है।

उपरोक्त तरीक़े से यह पता लगाया जा सकता है कि गत विधानसभा चुनाव में इस्तेमाल की गई ईवीएम मशीनों के साथ छेड़छाड़ की गई है या नहीं। अगर चुनाव आयोग चाहेगा तो इस प्रयोग के द्वारा ईवीएम की छेड़छाड़ का सच सामने आ सकता है। लोकतंत्र को बचाने के लिए आम आदमी पार्टी किसी भी स्तर पर जाकर संघर्ष करने के लिए तैयार है क्योंकि अगर ईवीएम की विश्वसनीयता पर पैदा हुए संदेह के पीछे के सच को देश की जनता के सामने नहीं रखा तो यह देश तानाशाही के चंगुल में चला जाएगा जो किसी भी लोकतांत्रिक गणतंत्र के लिए बेहद ख़तरनाक है। 

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